Matwar piya || मतवार पिया

जब उनसे मेरी शादी हुई तो मैं बहुत खुश थी, क्योंकि रोज मछली पकडने को मिलता था । मैं पहले इतनी ज्यादा खूश नहीं थी बच्चो के प्रती पर शादी के बाद नजाने मुझे क्या हुआ ? कि बच्चे मुझे अच्छे लगने लगे ।  उनके साथ बहुत खूश थी क्योंकि वो मेरे बहुत खयाल रख रहे थे, मेरे देखभल मे कोई कसर नहीं छोडते थे और रोज मछली पकडने को भी तो मिलता था ।
Matwar piya
Matwar piya
मेरे ससुराल गये छ: महीना बित चुका था, उनके छोट भाई के शादी होने के, दो सप्ताह बाद हम में बँटवारा हो गया । पहले घर से कुछ दूर मे हम रहने लगे । घर मे हम दोनो केवल रहने लगे, आलग होने के बाद घर के काम भी बाढ गया जैसा लगा, कुछ दिन तक काम काज से आराम करने का समय तक नहीं मिलती थी । लेकिन कुछ दिन के बाद मुझमे सुधार आयी और घऱ के काम जल्द से कर लेती और मुझे कुछ देर आराम करने को मिल जाती थी । मेरे पती देव के आधा समय तो खेत मे बित जाया करता और मैं घर मे उनका ईंतजार  करती । जब जल्दी नहीं आते थे तो मै उन्हे देखने खेत ही चाली जाती थी ।
 
एक दिन मेरे पती खेत गये हुये थे, उनके छोटे भाई के घर गई हुई थी, उनके पत्नी से मिलने । उसके पती यानी मेरे देवार घर पर नहीं थे, बैठे हम मेरे देवार के पत्नी के साथ बातें कर रहे थे । कुछ देर के बाद उनके पती आये, वे शरब पिये हुये थे, मुझे लगा कि वे दोस्तों के साथ मजाक मजाक मे पी लिये होंगे । देवार कुछ काह न दे, यह सोच मैं जल्द से निकाल के अपने घर लौटी तो देखा कि मेरे पती देव खेत से लौट के बैठे हुये हैं । मै उन्हे जल्दी से पानी दि, उनके सामने बैठ गई, उस दिन उन्हे क्या हुआ कि ? वे हमेशा तो चिपक के बैठा करते थे, और उस दिन वे मेरे तरफ देखने की वाजह, ओर तरफ मूँह किये बैठे हुये थे । मुझे लगा कि मेरे घर मे न होने के कारण नाराज हो गये होंगे, यह सोच मैं उनसे कुछ नहीं कही ।
कफी रात हो चुकी थी, हम बिस्तार पर लेटे हुये थे, लेकिन उस दिन क्या हुआ कि वे मेरे तरफ हीं मूँह ही नहीं कर रहे थे, शायद ज्यादा ही नरज हो गये यह सोच मैं भी सो गई । आधी रात किसी बदबूह ने मुझे जागा दि, पती देव मेरे तरफ मूँह किये सोये हुये थे, और बदबूह जो आ रही थी, उनके मूँह से आ रही थी । मैं सामने करके साँस ली तो पता चला कि वे शरब हुये पिये थे, वही छूपा रहे थे, । शायद दोस्तो के साथ पिये होंगे यह सोच मैं सो गई ।

Matwar piya
Matwar piya
 
उस दिन के बाद पती देव रोज दारू पि के आया करते थे, मछली पकाडना तो दूर कि बात, माशीन ठिक से काम नहीं कर रहा था, मुझे गुस्सा आ रही थी । एक दिन मैं गाँव के लडके से मेरे पति के बारे पुछी क्या वे शादी से पहले भी दारु पिते थे ? उस लडके ने जो बताया मेरी होस उडा दि, वे एक नम्बर का मतवार है, आप के साथ शादी हो जाये इसीलिये गाँव वालों ने मिलके इस बात को छिपा दिये, और आप के पती कुछ दिन पिना छोडे थे, और आजकाल ओर दारु पिना शुरू कर दिये है ।
 
उनके बारें जन्ने के बाद भी मैं उनके साथ रुकी रही, यह सोच के कि शायद की पहले दिन कि तरह हो जायेंगे । लेकिन इतना ज्यादा मतवारी करना शुरू कर दिये थे कि नहाना तक छोड दिये । वे तीन दिन से नहाये नहीं, इसीलिये मुझे उनसे तालाक चाहिये ।
 
कहते हैं झूट बोलने से किसी का घर बसती हो, तो वह झूट नहीं कहलाता, एक झूट कि वाजह से किसी का घर तो बस जाता, पर किसी का जिंदगी भी खरब हो जाती है, और किसी के जिंदगी खरब करना किसी ओर के हाक मे नहीं है ।

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