हँसी की अलग नजरीया

 कहानी आधारित है कोलेज के तरफ से घूमने गये विध्यार्थीओं कि, उनमे से दो लडकीयाँ को कुछ आंजन लडके पटाने के कि कोशिस करते है । 

 हम कोलेज के तरफ से बीच पर गये थे, कई लोगों यह आजीव लग रहा होगी लेकिन हम सामुद्रा मे ही गये । और हमारी कोलेज मे आखीऱि साल भी  था, सभी कोई एक साथ मनोरंजन के लिये समुद्रा के किनारे मे गये हुये थे । वहाँ कोलेज वालों के आलावा और कई अन्य लोग भी थे ।
हँसी की अलग नजरीया
हँसी की अलग नजरीया


मैं अपनी सहेली निलू के साथ समुद्रा के किनारा पर बैठे, खुली हावा का आनंद ले रहे थे, और बाकि तो अपने अपने धून मे गूंज रहे थे, कई तो बच्चों कि तरह खेल रहे थे, कई अपने अपने बँदीओं के साथ माजे कर रहे थे, यानी कि उनसे बातें कर रहे थे, आप भी न क्या-क्या समझ लेते है ।


हम बैठे हुये थे,तभी वहाँ हमारे कुछ दूर मे तीन आंजन लडके जा के वे खडे हो के अपना बातेँ करने लगे, वे हमारे कोलेज के नहीं थे । इतना आवाज से बातें कर रहे थे कि हमे साफ साफ सूनाई दे रही थी । वे बातों के व्दारा एक दूसरे को बहुत बडा दिखाने या बताने कि कोशिस किये जा रहे थे ।

थोडा बात करते और हंसाने वाले शब्द जब बोलते तो वे हमारे तरफ देखते, वैसे कुछ देर तक होता रहा, लग रहा था कि वे तिनों हम दोनों के तरफ ये देखने के लिये देख रहे थे कि हम उनके जोक पर हाँस रहे है कि नहीं । वे शायद हम दोनों को पटाने के फेर मे थे, इसीलिये बातों मे जोक निकाल जाती तो वे हम दोनों के तरफ देख रहे है कि नहीं, हमे कुछ ऐसा लगा ।

हँसी की अलग नजरीया
हँसी की अलग नजरीया

हाँसी तो उनके जोक पर एक भी नहीं आ रही थी, लेकिन हम भी वहाँ उन्हे खूश करने के लिये । वे जब भी हमारे तरफ देखते या फिर जोक मारते तो हम जबरजस्ती हँस लेते । कुछ देर वैसा ही चलता रहा, शायद उन मे से एक लडका तो हमारी झूठा स्माईल को दिल मे ही ले लिया । उस्से शायद पाता नहीं था, कि स्माईल करना हर लडकी की आद्दा है, जो प्यार समझे वह गधा है ।
हँसी की अलग नजरीया
हँसी की अलग नजरीया


 वह अपनें दोस्तो को छोड के हम दोनों के पास जा के बैठ गया, मैं उसके पागलपन को देख आंदर ही आंदर हाँस रही थी, लेकिन अपने हाँसी को आंदर मे ही रोके रखी । मेरे सामने बैठा इतनी प्यासी भारी शब्दों, से बातें कर रहा था कि मैं तो दिवानी हो ने वाली थी । मुझे कुछ कहना भी नहीं बन रहा था, जाओ यहाँ से कहती तो शायद बेचारे का दिल टूट जाता, वह दिवाने भारे बातों से मुझे दिवानी करने मे ही लगा रहा और मैं उसके बातो में तल से तल मिलाती चाली गई ।


कुछ देर हो चुका था, तभी मेरे
बोयफ्रैंड घर जा के लौट हमारे पास गया । और मुझे ओर विध्यार्थीओं के झूंड मे ले गया, आनंद लेने के लिये । जब मैं अपनी बोयफ्रैंड के साथ जा रही थी, उस लडके चेहरे मे बहुत ज्यादा मुर्झापन आ गया था । शायद वो मेरे स्माईल को सच में प्यार ही समझ गया था, हलाँकी हम उन्हे खूश करने के लिये हम हँसे तो, वो तो गलत ही समझ गया ।

हँसी की अलग नजरीया
हँसी की अलग नजरीया
चेहरे पे हमेशा, स्माईल रखने पर कई दोस्त बनते हैं, लेकिन कोई हमारे स्माईल को गलत समझ लेते है । इसीलिय है हाँसी की आलग नजरीया, जो समझना चाहीये कि स्माईल करना हर लडकी की आद्दा है, जो प्यार समझे वह गधा है ।

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