Hostel Ek horror story कुछ सालों पहले कि बात है, गिरेद स्कूल मे दाखिला लिया । वह घर से बहुत दूर गया था, कि उस्से होस्टल मे रहना पाडा । गिरेद शाम को होस्टेल पहूंचा और गिरेद के लिए होस्टेल नया था ।  पहूंचते ही गिरेद छत को चला गया, छत मे बहुत सारे लडके थे पर जैसे-जैसे शाम हुआ वैसे-वैसे छत के सारे लडके अपने-अपने रुम को उतर गये । लेकिन गिरेद छत मे ही खडा रहा धूंधला रात हो चुका था, आस-पास के नजारे धूंधला सा देखाई दे रहा था ।

Hostel ek horror story
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गिरेद अकेला ही खडा था, तभी गिरेद को कुछ दूर बगीचा मे सफेद कपडा मे बैठा कोई दिखाई दिया । वह अकेला ही बैठा हुआ था, गिरेद उस्से कुछ देर तक देखता रहा पर वह वहीं ही बैठा रहा । कुछ देर कफी अंधेरा हो चुका था, ईसीलिए वह बैठा आदमी दिखाई नहीं दे रहा तो तो गिरेद अपने रुम के तरफ बाढने लगा । तीन चार कदम ही बढाया था कि उसी बगीचे मे किसी के जोर से चिलाने कि आवाज आती है, गिरेद के कान मे पहूंचते ही दोबारा खडा था वही दौड के गया और बगीचे के तरफ देखा आंधेरा होने के कारण कुछ दिखाई नहीं दिया ।

 
थोडी देर तक खडा रहा पर गिरेद को और किसी प्रकार के हलचल सूनाई नहीं दिया तो गिरेद अपने रुम के तरफ बाढने लगा । सिढी मे उतर रहा होता है उस्सी समय एक लडका अपने सिर को झुकाये सिढी से ऊपर चाढ रहा होता है । जब वह सामने पहूंचा तो भी वह लडका सिर को झूका के ही चाल रहा था । गिरेद को वह लडका बडा अजीव लगा, दिवाल मे चिपक के खडा गिरेद वह लडका को देखता रह गया और वह लडका छत के ऊपर चला गया ।
 
 उसे देख के गिरेद सिढी से उतर ही रहा होता है, कि गिरेद को दौडते हुये सिढी से किसी के ऊतरने कि आवाज आती है, गिरेद मूड के देखा तो सामने बिना चेहरे वाला आदमी स्कूल ड्रेस मे सामने खडा रहा होता है ।  अचानक लगा कि गिरेद को वह आदमी धक्का दिया और गिरेद सिढी मे ही गीर के बेहोस हो गया ।
 
जब सूबह उठ के देखा तो गिरेद आपने आपको बिस्तार मे पडा हुआ पाया । गिरेद उठ के बिना किसी को कुछ बताये तैयार हो के स्कूल चला गया । स्कूल के टिफीन के समय गिरेद स्कूल के बागीचे मे गया जहाँ पर वह सफेद आदमी बैठा दिखाई दिया था । जब वहाँ पहूँच के देखा तो वहाँ पर एक पूराना कब्र था, कब्र को देख गिरेद जल्दी से बगीचे से निकाल गया ।

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स्कूल छूट्टी के बाद गिरेद होस्टल एक पूराने छत्र को बताया कि स्कूल के बागीचे के कब्र मे शाम को कोई सफेद कपडा मे बैठा दिखाई दिया । वह बताया कि– मेरे आने से पहले यह होस्टेल मे बहुत सारे लडके थे, यहाँ के सारी खर्चा स्कूली था और ज्यादातर होस्टेल मे अनाथ बच्चे थे । होस्टेल के लडकों को माह मे 2 दिन माँस दिया जाता था, लेकिन माँस मे बहुत ज्यादा हल्दी मसाला तथा मिर्च मिलाया जाता था, जीसे खाने के बाद कई सारे छत्राओं का पेट खरब हो जाता था ।
 
एक दिन माँस मे ज्यादा ही हल्दी मसाला के साथ मिर्च मिलाया गया था, उस दिन के बाद दो दिन तक कई सारे लडको के ज्यादा से समय टोयलेट मे बिताना पडा । उन लडको मे से ही एक लडके कि तबीयात कुछ ज्यादा ही खरब हो गया था और कुछ देर बाद इसी होस्टेल में उसकी मौत हो गया ।
 
वह अनाथ था इसीलिये उस्से स्कूल के बागीचे मे उस्से दफना दिया । उस दिन से कई सारे लडकों को कब्र पर बैठे वह दिखाई दिया । यह सब देख कई सारे लडके होस्टेल छोड के चाले गये ।
शूरूआती कहानी कल्पनिक है, पर दूसरी कहानी सच्चे घटना को बताता है ।

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