सन् 2050 अब मै 55 साल का हो गया हूं, हर किसी का बचपन कि एक कहानी जरुर होती है, और बचपन कि कहानी कि बात ही कुछ अलग होती है । वैसे ही कुछ मेरा भी एक कहानी है, मै कफी भूलाने कि कोशिस किया पर बहुत दिन बितने के बाद भी मै अपने बचपन कि उस कहानी को भूला नहीं पाया । हम शहर मे रहते थे, और मै जन्मजात से ही अपने गाँव नहीं गया था । जब हम अपने गाँव के लिये जा रहे थे तो मैं बहुत खूश था, क्योंकि मैं अपना गाँव कुछ देर बाद पहुंचने वाला हूँ ।
जब हम गाँव पहुंचे तो लगा कि पूरा गाँव ही पार्क है, इतना हरा भरा था, आस पास के नजारे ही देखता रह गया । बहुत खूबशूराज नजारे देखने को मिला जैसे कि पार्क । घर पहूंचने तक शाम हो चुका था, मैं गाँव कि पूरी नजारे देखने के लिये बहुत खूश था, लेकिन शाम हो जाने के कारण घूम न पाया ।
शूबह होते ही गाँव के नजारे देखने के लिय घर से रोड मे निकाल गया । उस्सी समय व्हाट्स एप ग्रूप मे मैसज आया । मैं रिप्लाई देते हुये, फोन मे देखे हुये पैदल चाल रहा था । मेरा पूरा ध्यान मोबाईल पर था, चलते चलते टकरा जो गया उस लडकी से टकरा ने के बाद गया मेरा ध्यान उस लडकी का मे दिल मेरा वो लडकी ले गई उस्सी समय ।
मेरा टकराने के बाद हाथ मे जो पकडी थी, वो गिर गई, वो गिरे समान को उठाने मे लगी थी । उठाते देख मै उठाने मे उसकी मदत के लिये उठने लगा, उठाते हुये मिल गई हम दोनों कि नाजर इसकदर कि हम एक दूसरे को देखने लगे थे । जब वो एक छोटी सी स्माईल कि तो उस छोटी सी स्माईल ने मुझे मरने के लिये मजबूर कर दिया । वो उठाई और जल्दी से जान लगी, मैं उसके पिछे जाता पर गाँव है यहाँ कोई ठोक न दे यह सोच उसका पिछा नहीं किया ।
मै खडा उसके मूडने का इंतजार कर रहा था, कुछ दूर जा के जब वो मूड के एक स्माईल फेंकीं तो दिल को पुरा पागल कर दिया । उसके टकराने के बाद मेरा गाँव देखने का मूड ही खरब हो गया, मुझे देखने का ही मन नहीं किया । जैसे लगा कि सारा गाँव के खूबशूराज चिंजे मैने उसका मे देख लिया ।
दोबारा देखने का मन किया उस लडकी को लेकिन वो मेरे सोचने तक कई दूर जा चुकी थी, पर वो दिखाई दे रही थी । मै जा ही रहा था कि मेरा पिता जी का फोन आ गया फोन जब उठाया तो उन्होने कहा कि काल ही वापस लौटेंगे पूरे गाँव आज ही देख लो ।
पिता जी के फोन आने के बाद मुझे लगा कि उस लडकी को जल्दी से आज ही पटा लेना चाहीये नहीं तो क्या पता दोबारा गाँव आने का मौका मिलेगा या नहीं यह सोच मै उसके पिछे पिछे जाने लगा । उसके पिछे पिछ जा ही रहा था कुछ दूर जा के देखा कि वो तो किसी ओर कि हो चुकी है । ये सब देख मुझे उस लडकी को अपने दिल से उस्सी ही दिन हटाना पडा । उस दिन के बाद मैं अपना गाँव फिर नहीं गया, पता नहीं गाँव अब कैसा होगा ।

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