धर्मा कि मंजील  बहुत सालों पहले देवतायें अपने आप मे लडने( क्यों देवतायें आपस मे लडे पढें पृथ्वी रक्षक ) कि वाजह से कफी देवतायें मारे गये और कुछ बचे देवताओं मे से एक धर्मा नाम का देवता स्वार्ग को छोड के ब्राम्हाण्ड मे अपना नया स्वार्ग के निर्माण मे निकाल जाता है ।

धर्मा सालो तक ब्राम्हाण्ड मे भटकता रहा लेकिन धर्मा को ऐसा जगह नहीं मिला, जहाँ कि अपने रहने योग्य हो । ब्राम्हाण्ड मे भटते हुये धर्मा स्वार्ग लोक से बहुत दूर चाला जाता है ।
देव-6 धर्मा कि मंजील
देव-6 धर्मा कि मंजील
वैसे ही भटक ही रहा होता है कि धर्मा को एक सुंदर सा ग्रह दिखाई दिया । उस ग्रह को देख बहुत अश्चार्य हुआ, धर्मा मन ही मन सोचा आखिर किसने बनाया होगा यह ग्रह । जान्ने के लिये धर्मा ग्रह के चक्कर लगाने ही रहा होता है कि धर्मा देखा  कि उस ग्रह मे उसके जैसे दिखने वाले किसान दिखाई दिये ।
ग्रह वासीओं से बच के धर्मा गोला के चक्कर लगाने लगा । कुछ देर किसानो के आमने सामने रह के धर्मा को पता चला कि उन किसानो के पास देवताओ जैसी शाक्तीयाँ नही है और वे अपने शरीर के बल से ही काम करते है ।
 
ग्रह के चक्कर लगाने के कुछ देर बाद उस्से एक बडा सा चमकता महाल दिखाई दिया । धर्मा गायब हो के महाल मे प्रवेश कर गया, महाल के आंदर जा के देखा तो महाल मे पाँच जादूगरे बैठे हुये थे । वे किसान लोक के किसानों को और सुविधा देने के बारे मे बात चित रहे थे ।

उसी समय धर्मा को पता चला कि जिस्से वह गोला समझ रहा था, वह किसान लोक है । वहाँ के देवतायें केवल जादू से ही किसानो को सुविधा देते थे । किसान लोक के देवताओं के कमजोरी देख धर्मा के मन बुरे विचार दौडने लगा । धर्मा वहाँ के देवताओं को हटा के वह वहाँ का देवता बन्ने का सोचा और इस बात पर भी सोचा कि अगर उस्से अपना स्वार्ग बनायगा तो, उस्से कइ वर्षों लग सकते है ।
 

जादुगरे किसान लोक के चर्चा ही कर रहे होते है उस्से समय धर्मा उनके सामने प्रकाट हो जाता है । जब धर्मा उन्हे दिखाई दिया तो महाल मे बैठे जादूगरों कि आँखे खुली कि खुली रह गई और धर्मा को देख कार्नर नाम का जादुगार धर्मा से पूछता है कौन हो तुम ? धर्मा कहता है मैं इस लोक का होने वाला राजा हूँ । और कार्नर कहता है हम यहाँ के राजा है हमारे होते हुये कोई इस लोक के राजा नहीं हो सकता ।

देव-6 धर्मा कि मंजील
देव-6 धर्मा कि मंजील

 
उसके बातो पर गौर कर के धर्मा कहता है – अगर तुम लोग यहाँ के राजा हो तो मैं तुम लोगों से छिन लूंगा । उसके बात सून जादूगरों के राजा दमेन कहता है हमसे कैसे छिन्नेगा चालो देखते है । दमेन के इसारे पर वे जादूगरे धर्मा पर टूट पाडते हैं लेकिन धर्मा के हाथ दिखने पर ही वे जादूगारे इधार उधार फेका जाते हैं । जादूगरो के राजा भी धर्मा के एक ही हाथ मे वह टिक नहीं पाया ।

धर्मा के शाक्ति देख जादूगरो को किसान लोक छोडना पडा वे उसी समय ही गायब हो गये । जादूगरों के
चाल जाने के बाद धर्मा किसान लोक का देवता बन गया । किसान नये देवता से कफी खुश थे क्योंकि वह उनके अवश्यकता कि पूर्ती महाल पहूंचने से पहले ही पूरी कर देता था । 
 
सालों बितने के बाद धर्मा ने अपने किसान लोक के देखभल के लिये उसने तीन देवताओ को बनाया । वे चारों मिल के पूरे किसान लोक का देखभल करने लगे और किसानो का भी पुरी तरह से देखभल करने लगे ।
  

 

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