जीवा | एक सवाल मन में मेरे चाचा एक शराबी थे बहुत शराब पिते थे और रोज घर पर झगडे करते थे, लेकिन कुछ दिनो से वे शरब पिना ही छोड दिये और वे परिवार के सदस्यों के साथ एक शारीफ कि जीन्दगी जिने लगे । मुझे किसी ने बताया कि जीवा नाम के लडने उसे ठिकाना लगाया, तब से शरब पिना छोड दिये हैं । चाचा के शरब छोडने से, मै बहुत खुश थी, क्योंकि उनके परीवार में बहुत सुधार आ गया था, खुशी कि वाजह से मै जीवा को एक बार देखना चाहती थी ।

जीवा | एक सवाल मन में,
जीवा | एक सवाल मन में,

मैं कोलेज के लिये बस स्टैंड मे खाडी थी, बस कि आने कि समय हो चुकी थी पर बस कि आने कि नाम नही ले रही थी । कुछ देर खडी होके मैं अपने सहेलियों के साथ बात चित कर रही थी । तभी हमारी नाजर एक ऐसे व्यक्ति पर पाडी जो कि शरब पिके, लूंड हो के, कब से सोया हुआ था । सोया ही था पर कोई उठाने का नाम न ले रहे थे । मैं उठाने के लिये जाती पर मेरे सहेलियों ने मुझे माना कर दिये, यह काह के कि वह शरब पिया आदमी कुछ गलत जगह पर हाथ न लगा दे ।

 
समय बित्ता ही जा रहा था बस कि भी आने कि कोई खबर नहीं मिल रही थी मेरी नाजर हर समय उस शख्स पर जाती ही रही, काश कि मै उस्से उठा देती यह सोचती रही । तभी तिन लडकों के झूंड हमारे पास आके खडे हो गये, वे भी शायद बस से ही जाने के लिये ही खडे थे । कुछ देर बाद उनकी नाजर शरब पिके लूंड, व्यक्ति पर पाडी, तो उनमे से एक ने कहा उस्से तो सिर्फ जीवा ही उठा सकता है, एक बार उठाने के बाद वह कभी रोड किनारे सोयेगा नहीं ।
 
 चालों जीवा को बुला के लाते हैं, यह काह वे जीवा नाम के व्यक्ति को बुलाने के लिये चाले गये । मेरी जीवा को देखनी सपना पूरा होने वाला था और  मैं जन्ना चाहती थी कि आखिर कौन है जीवा और एक बार ऊठाने के बाद कभी सडकों के नहीं किनारे सोयेगा । ऐसा क्यों काह रहे थे ? मै देखना चाहती थी कि आखिर क्या करेगा जो कभी शरब पिये तो कभी रोड किनारे नहीं सोयेगा ।

कुछ देर मे मेरे बस आ चुकी थी, पर वे लडके तभी तक जीवा को लेके नहीं पहुंचे थे मेरे सहेलियाँ उस बस से चाले गयी । पर मैं बस स्टैंड मे ही रुकी रही देखना चाहती थी कि कैसे ऊठायेगा ?  कुछ देर के इंतजार के बाद चार ल़डको का झूंड पहुंचा ।

एक सवाल मन में
एक सवाल मन में
 
वे सिधा उस सोये व्यक्ति के पास गये उनमे से नया जो दिखाई दे रहा था वही शायद जीवा होगा मन मे बोली । जीवा थर्मामिटर उसके मूंह मे डाला, वैसे दिखाई दे रहा था, थर्मामिटर डाल के क्या चेक किया पता नहीं ? फिर जो मैंने देखा मेरी आँखे खुली कि खुली रह गई । सोये व्यक्ति के ऊपर वे लडके मिलके अपने अपने स्टाईल से लात,घूसों कि बारीष करने लगे । दो तीन बार हवा मे भी उसे उछाले, आलु के बोरी कि तरह गिरने के बाद भी नाशा उसका उतरा नहीं  था । 

बहुत पिट रहे थे, मुझे लगा उन्हे रोकना चाहीये पर देखी आस पास के युवायें सिर्फ देख के पार हो जा रहे थे कोई कुछ नहीं काह रहे थे । लेकिन जो बाद मे मैने देखी वह तो और भी ज्यादा चौंका दि उसके ऊपर मिट्टी का तेल (किरासीन) डालने लगे । मैं डालते देख रोकने के लिये दौडी पर मेरे पहुंचने से पहले ही जीवा उस व्यक्ति के ऊपर आग लगा दिया ।
 
सोये व्यक्ति झट से उठा और बचाव बचाव चिलाने लगा, कुछ देर उस्से जलते देखते रहे और वे चार आग को बुझा दिये और जैसे ही उस व्यक्ति का मे जलते आग को बुझाये जीवा वैसे ही उस व्यक्ति को जोर चँटा मारा और कहा जाओ अपने घर जाओ और कभी रोड मे सोते देखा न तो जिंदा जला देंगे । उस व्यक्ति के ऊपरी चमडी थोडा बहुत जाल गया था ।
एक सवाल मन में
एक सवाल मन में


जीवा के हरकाते देख मुझे आच्छी नहीं लगी । मुझे गुस्सा आ चुकी थी और गुस्सा से मैं जीवा से कही क्यों जलाया उस्से
? तुम इंसान नहीं हो क्या ? तुम्हे जलाते तो कैसे लगता ? ये कोई उठाने का तारीका है ? मैं ऐसे ही कई सवाल कि, जीवा के ऊपर । मै जब जीवा से काह रही थी तो गुस्सा से मेरी शरीर फूल गयी थी, मैं कुछ देर के लियें लडके कि तरह हो गई थी । लेकिन उन सबका जवाब जीवा ने यह काह के दिया – जो अपने घर वालों को बदनाम करते हैं, उनका हम यही आंजम करेंगे इनके वाजह जो परीवार वाले बदनाम होते हैं, उनका दर्द आग के जलने से भी ज्यादा दर्द होता है । बडे गुस्से से यह काह के जीवा वहाँ से चला गया, मैं समझ गई थी कि वह शराबीओं से नफरात करता है पर मेरे मन मे एक ही सवाल बार-बार गूंज रही थी । न जाने वह क्यों करता है

?

 
छोटी सी बात
 
मनते है उन लोगो तक यह लेख नहीं पहूंचेगा, और ये छोटी सी कहानी भी नहीं । अगर पहुंच भी जायेंगे तो पढेंगे नहीं, क्योंकि उनके पास समय ही कहाँ रहता है । फिर भी छोटी सी बात, अगर परीवार के बाडे सदस्य ही वैसे रहेंगे तो, बच्चो कि अवश्यक्ता कैसे पूरा करेंगे । चालिये बच्चे नहीं है, माता पिता तो है, न अगर आप ही वैसा रहेंगे तो उनका खयाल कैसे रखेंगे । उन्होने जो सपना साजा के आपको बडा किये, उनका सपना पूरा कैसे होगा ? जिन्दगी देखा जाये छोटी है और कहीं भी बताया नहीं गया है कि कब खतम हो जाये । दिन मे शरब पि के सो के बहुत समय बर्बाद होता है, अभी पता नहीं चाल रहा पर जब तक समझ आयेगा बहुत देर हो चुका होगा । उस समय न ही ताकत रहेगी न ही पैसे, शरब पिके पैसे तो बर्बाद किये साथ ही अपने आपको भी बर्बाद किए ।
 
वैसे जिन्दगी आपकी है और आप किस तरह जिना चाहते हैं, आपके ऊपर है । किसी को जबरजस्ती करना हमारा काम नहीं, और किसी को जबरजस्ती किया भी नहीं जाता इसीलिये तो कहते है । हमारे बताये बातों को अपने जिन्दगी से जोडे या न जोडे आपके ऊपर निर्भार करता है कि आप क्या करना पसंद करते है या फिर क्या करना चाहते हैं ।
 

Leave a Reply

Close Menu