जीवा-2 | मन में गूंज रहे सवाल का जवाब, मै यही खयाल मे रहती थी कि आखीर जीवा न जाने क्यों करता है ? कुछ हदतक तो मुझे लगी कि वह जो करता है सही ही करता है । लेकिन उसके हाथ उठाने के तारीके मुझे बहुत बुरी लगी ऐसा जला के भला कोई भठाता है क्या ? दुनिया मे और भी तो कई लोग हैं । वे बदनाम न हो जाये यह सोच शरब पि के सोये लोगों को नहीं उठाते हैं । तो वह क्यों उठाता है ? बार बार मुझे यही खयाल आ रही थी, और इसी तरह के कई सवाल मेरे मन मे गुंज रही थी । मुझे उसका पिछले जींदगी कि बारे मे जान्नी थी ।
जीवा-2 मन में गूंज रहे सवाल का जवाब
जीवा-2 मन में गूंज रहे सवाल का जवाब
आगले दिन मैं स्टोप मे कोलेज के लिये बस कि ईंतजार मे खडी थी । कुछ ही देर हुआ था कि मेरे पास आ के जीवा के एक दोस्त खडा हो गया । उस्से सामने देख मैं सोच रही थी कि उस्से जीवा के बारे मे पूछूं कि नहीं, फिर मै उस्से दोस्ती करने का सोची मैं जैसे ही हय.. कि, वह.. झट से बोला तुम वही हो ना, जो काल जीवा के ऊपर भडक गई थी और.. अनेकों सवाल फेंकी थी । मैं अश्चार्य से हाँ..हाँ.. कि और मैं बोली मुझे लगा जीवा के आलावा कोई मेरे तरफ ध्यान ही नहीं दिये थे । वो बोला नहीं हम आस पास सभी को देखते है आखिर लोगों का रिय्कशन कैसा है यह देखने के लिये ।
इस्से पहले कि कुछ पूछती मेरी बस आ चुकी थी, हम दोनो साथ उस्सी बस मे चढे ।
 
 उसके और करीब होने के लिये पुछी कि कहा जा रहे हो ? आगले स्टोप तक ही जा रहां हूं वो बोला । मैं आवाज को रोक रोक के और सवाल करते हुये कही काल आराम से सो रहे व्यक्ति को क्यों जलाये ? तो वह जोर से हँसा और सिम्पल सा जवाब दिया हम अपने माजे के लिये जलाये थे । उसके जवाब सूनके लगा कि वह मेरे सवालों के जवाब ठिक से नहीं देगा यह सोच और पूछना ही छोड दि, वहीं मन मे गुंज रहे, सवालों को दबा दि ।  कुछ देर मे उसका स्टोप भी पहुंच गया ।
 
दो दिन बित गया था, मैं अपने बेस्ट फ्रैंड के साथ कफी शोप मे गई हुई थी । हम बैठे कफी पि रहे थे, तभी जीवा तथा उसके दोस्त कोफी शोप मे गये । वे हम से कुछ ही दूर जा के बैठे थे । मैं अपने सहेली को आँखों से इसारा करते हुये धीमी शूर मे पूछी, उस्से जनती हो क्या ? मेरी सहेली हाँ करते हुये कही उसका नाम जीवा है, तो तुम क्यों पूछ रही हो ? मुझे उसके बारे मे जन्नी है, जानती हो क्या ? मैने कही ।

 

 उसका बहुत ही बुरी कहानी है, चालो तुम को खुले स्थान मे बताती हूं, यह काह हम खुले अस्मान के निचे  चले गये । मैं बहुत खुश थी कि मेरे मन मे जो सवाल गुंज रहे हैं वह आज मुझे मिल जायेगी ।  पर खुले अस्मान मे पहूंचने के बाद मेरी सहेली मुझसे सवाल करते कही, क्यों उसके बारे मे जान्ना चाहती हो ? कहीं तुम्हे उस्से प्यार तो नहीं हो गया ? मैं जल्दी बताये यह सोच  मजाक मे कही वैसे ही कुछ समझो । तो बताओ न-
 
जीवा का असली नाम जितेन है, उसके परीवार मे उसका माता पिता साथ मे उसकी वाहन रहते थे । जितेन को किसी लडकी से प्यार था, और वो लडकी खन्दानी थी । जितेन के परीवार मे भी उसका माँ तथा बाहन बहुत आच्छे थे, पर उसके पिता एक शराबी थे । जब जितेन 21 वर्ष का हुआ तो जितेन के घर वाले रिश्ता लेके, वे उस लडकी के घर पर गये, ल़डकी वाले जितेन के साथ शादी करने के लिये वे साफ माना कर दिये । क्योंकि लडकी की पिता जितेन पिता को कई बार शरब पि के सडकों पे सोते देखा था । लडकी वालों के घर से, निकाल ने से पहले सबके सामने जितेन को लडकी के पिता ने कहा कि जबतक तुम्हारे पिता शरब पिना नहीं छोडेंगे हम अपनी बेटी तुम्हारे घर नहीं भेंजेंगे चाहे तुमलोग जितना भी एक दूसरे को क्यों न चाहते हो ?

अपने पिता के मतवार गिरी के कारण उस लडकी से शादी नहीं हुआ, इस बात पर वह कफी दु:खी  था । अपने पिता के शराब छोडने का इंतजार किया पर छ: महिना बित जाने के बाद भी उसके पिता शराब पिने छोडने कि वाजय, शराबी ही रहे, उनमे थोडा सा भी बादलाओ नहीं आया । जब जितेन के पिता नहीं सुधरे तो जितेन भाग के शादी करने का फैसला किया पर वो लडकी घर वालों के खिलाफ शादी करने के लिये माना कर दी । जितेन उस दिन बहुत गुस्सा में घर लौटा और एक दिन गुस्से मे आ के अपने पिता को जान से मार दिया । शायद ईसीलिये कहते है गुस्सा ईंसान को खा जाता है ।

जीवा-2 मन में गूंज रहे सवाल का जवाब
जीवा-2 मन में गूंज रहे सवाल का जवाब
अपने पिता के हात्य के बाद जितेन अपने आप को पुलिस के हवाले कर दिया, जितेन के जेल मे आच्छे स्वाभव को देख उसका सजा कुछ हद तक माफ कर दिया और उस्से जेल से रिहा कर दिया गया । जेल से निकालने के बाद घर पहुंचा तो पता चला कि उसके माँ और बाहन भी इस दुनिया मे नहीं रहे । उसके पास एक ही थी, उसके G.F. उसकी G.F. के घर पहुंचा तो पला चला कि उसकी भी शादी हो चुकी है । जितेन के सून्ने वाला कोई नहीं था, वह पास वाले स्टेशन मे बैठे रो रहा था । उस्से बहुत पछतावा हो रहा था कि अपने जिस खुशी के काऱण मैं अपने पिता का खून कर दिया, वही खूशी मुझे नहीं मिली अनेको ऐसे ही मन मे सोच के फूट फूट के रो रहा था ।
 
जितेन को समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या करे बचे जिंदगी ? कैसे बितायें? कुछ समझ नहीं आ रहा था, स्टेशन पर एक माल गाडी खडी थी । खडी देख माल गाडी मे चाढ गया वह उसी मे ही सो जाता है । सुबह जब उठ के देखा तो उस्से माल गाडी इतना दूर ले आया था कि समझ ही नहीं पा रहा था । आखिर वह कौन सी जगह पर है । जितेन माल से उतार के रोड मे जा रहा था, तभी उसने सूबह सूबह एक शराब पिये व्यक्ति को सोये देखा तो उसके मन गुस्सा से भार गया और वह उस्से जोर जोर से लत घुस्सो कि बारिष करने लगा । तभी वे तिनों आके वे भी अपने अपने स्टाईल से लात और घुस्सों कि बारीष कर करने लगे । उस्सी दिन उन सब की मुलाकत एक दूसरे को साथ हुई । और कई लोगो को जलाये, कई परीवारों मे खूशियाँ लये ।
 
उसके कहानी बहुत ही दु:ख भारी लगी । लेकिन मुझे नही पता था कि मेरी एक झूट इतनी बडी गड्ढा मे धकेल देगा सोचा नहीं था । मैं जीवा के पिछले जींदगी के बारे मे जन्ने के लिये मैने मेरी सहेलिया दिया से झूट बोली कि मै जीवा से प्यार करने लगी हूँ । शायद अगर मैं उस्से वैसा नहीं कहती तो वह सच नहीं बताती केवल झूट बोल के पार हो जाती । मुझे लगा कि हम दोनों कि बीच के यह झूट जो मै बोली वो हम दोनो के बिच मे ही अटकी रहेगी । पर ऐसा नहीं हुआ, मेरी सहेली मेरे झूट को सच मन के जीवा को  सब मेरे बारे मे बता दी । मुझे समझ मे नहीं आ रही थी कि मैं क्या करूँ ?
आगले दिन जीवा तथा उसके साथी मेरे घर पर आये और जीवा मेरे मम्मी पापा के सपने प्यार का इजहार किया । पिता जी कुछ बोलते पर मैने उन्हे रोक लि और मैने ही जीवा को सच बताते हुये कही कि झूट बोली थी मैं किसी और से प्यार करती हूं । मेरी बात सून पिछे खडा जिवा का देस्त भडक गया और आगे आ के गूस्सा मे कहा कौन हौ वो लडका टपका देंगे । जीवा अपने हाथों से दोस्त को पिछे करके मुझसे धिमे शूर मे कहा – कोई बात नहीं अगर तुम्हारे जींदगी मे वो लडका है इसीलिये तुम माना कर रही हो । अगर वो लडका तुम्हारे जींदगी मे नहीं होता तो क्या तुम मुझे हाँ करती ?
जीवा-2 मन में गूंज रहे सवाल का जवाब
जीवा-2 मन में गूंज रहे सवाल का जवाब
मै उसे जवाब देते हुये कही, वो लडका मेरे जींदगी मे नहीं होता तो भी न ही करती । क्या कामी है मुझमे ? क्या मै अच्छा नहीं हूं ? क्या मेरा शकल खरब है ? जीवा ने कहा । मै क्या कहूं समझ मे नहीं आ रहा था, एक तो वो कई लोगों को नाशा मुक्त किया और परीवारों मे खूशीयाँ लाया । मैं खमोश थी, मेरी खमोशीओं को देख जीवा फिर से वहीं सवाल को दोहराया अगर वो लडका तुम्हारी जींदगी मे नहीं होता तो क्या तुम मुझे हाँ करती ? मै उसका जवाब नहीं दी सिर झुकाये ही खडी रही । कुछ कहने ही वाली थी कि बिना मेरे जवाब सूने वहाँ से वे चले गये ।
एक्चयोली मै किसी से प्यार करती ही नहीं थी, पर मैने जीवा से झूट बोली, क्योंकि मुझे जीवा के कहानी सूनके जीवा से ही प्यार करने लगी । लेकिन मै उसके साथ कैसे आगे कि जींदगी बिताऊंगी, वो छोटी सी बात पर ही गुस्सा हो जाता है । आज और एक बात मुझे पता चली बडों का थोडा सा भी इज्जत नहीं करता है ।  किसी पे भी हाथ उठा देता है, ये सब मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता ।
मैं ईंतजार कर रही हूं उसके बादलने का, पता नहीं वो कब बादलेगा और उसके साथ कब जींदगी शुरू करूंगी । 

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