एक दु:खद कहानी काँसीथाल नाम के गाँव मे दो ऐसा परीवार था जिनके पास जामीन, तथा जयजाद अन्य गाँव वालों से कई अधीक था, पर इतनी होने के बावजूद ललची ईंसान के लिये बहुत ही कम लगता है । धनु अपने बडे भाई धनेन को मार कर सारी जामिन जायजाद और बहुत पुरानी महाल जैसे घर को अपने नाम करने का सोचा । और अगले ही दिन कि रात पूरे पारीवार को मार के खत्म ही करने वाला था, लेकिन धनेन का बेटा धिराज उसके मारने से पहले ही धनु के जाल से. बचा के भाग निकला । धनु को शाक हो गया था कि धिराज पुलिस वालों को बताने जा रहा पर, धनु धिऱाज के पहुंचने से पहले ही पुलिस वालों को खबर कर दिया कि धिराज अपने परीवार वालों को मार कर भाग गया है ।

एक दु:खद कहानी Ek sad kahani hindi
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पुलिस स्टेशन पहुंचने से पहले ही धिराज को पकड लिया गया, पुलिस वाले कोई भी बात न सूने उस्से सिधा जेल मे डाल दिया गया । उसे कारीब 12 साल के बाद जेल से, निकाल के धिराज सिध्दा अपना गाँव पहुंचा, गाव पहुंचने के बाद पता चला कि उसका चाचा धनु तथा उसके परीवार पुराने घर के गिर जाने से पुरे परीवार मारे गये । धिराज को अपने माता के हत्यारा काह के गाँव के लोगों ने धिराज को, गाँव मे रहने नहीं दिय गया । गाँव वाले जब उस्से रहने  नहीं दिये तो क्या करे समझ मे नहीँ आ रहा था । उस्सी समय स्टेशन पर एक माल गाडी रुकी, धिराज ने सोचा कि माल गाडी उस्से मंजील तक ले जायेगा ।

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धिराज के होटेल मे काम करने के बाद होटेले थोडा बहुत सुधार आया और होटेल आच्छे से चलने लगा था । लेकिन कुछ ही दिन हुआ था कि धिराज के होटेल मालिक कि दिल के बीमारी के कारण इस दुनिया को छोडना पडा । अपने मालिक के मार जाने के बाद मालिक के बेटी होटेल कि देख भल करने लगी । दिन बित्ता गया, न जाने मालिक के बेटी को क्या हो गई कि अचानक से धिराज से पुछी कि मुझसे शादी करोगे । धिराज उस लडकी को माना नहीं कर पाया और धिराज ने हाँ कर दिया । धिराज के उस लडके से शादी करने के बाद धिराज का जिंदगी ही बादल गया, वे साथ मिलके होटेल को चलाने लगे । उस लडकी के मिल जाने के बाद धिराज को अपना मंजील मिल गया, जो कि माल गाडी मे चढने से पहले धिराज सोचा था  ।

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